कौन है रोहिंग्या मुस्लिम?

Rohangiya Muslim
25 अगस्त को हुए म्यांमार में हिंसा के बाद से रोहांग्या मुस्लिम का मुद्दा फिर से अंतरराष्ट्रीय खबरों में है।गौरतलब है कि रोहिंग्या विद्रोहियों ने 25 अगस्त को म्यांमार में सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया था जिसके बाद म्यांमार सेना ने श्रेत्र में एक आक्रमक अभियान शुरू किया था जिसके चलते रोहांग्या लोगो को वह से भागना पड़ा। रोहिंग्या मुस्लिम एक अल्पसंख्यक जातिय समूह है जो की रोहिंग्या भाषा का उपयोग करते है। रोहिंग्या मुस्लिम ज़्यादातर रखाइन राज्य के बर्मा शहर, म्यांमार में रहते है। रोहांग्या काफी समय से म्यांमार में रहते है लेकिन म्यांमार नागरिक कानून 1982 के तहत म्यांमार उन्हें अपना नागरिक नहीं मानता है। रोहिंग्या आज भी अपनी जातीय पहचान के लिए लड़ रहे है। 25 अगस्त की हिंसा के बाद से रोहिंग्या मुस्लिम पास के देशों में शरण लेने के लिए मजबूर हो गए।  जिसमें बहुत से रोहिंग्या बांग्लादेश, भारत और अन्य कई देशों में पलायन कर चुके है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक म्यांमार में रखाइन प्रान्त के बाद से 4,80,000 रोहिंग्या अब तक बांग्लादेश में शरण ले चुके है और अब बांग्लादेश में रोहिंग्या मुस्लिम की संख्या 7,00,000 से अधिक हो गयी है। भारत में 40,000 के लगभग रोहिंग्या मुस्लिम रह रहे है और रोहिंग्या मुस्लिम का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।
गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने रोहिंग्या मुस्लिम को अवैध प्रवासी कहा और कहा कि उनके पास सामान्य भारतीय की तरह समान अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन गैर ज़रूरी रूप से केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे है। भारत ने दुनिया में सबसे ज़्यादा शरणार्थियों को जगह दी है इसलिए कोई भारत को न सिखाए कि शरणार्थियों से किस तरह निपटा जाए। रिजिजू ने पहले ही संसद में कहा था कि केंद्र सरकार ने राज्यों को रोहिंग्या सहित अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें निर्वासित करने का आदेश दिया है। इस हिंसा के बाद से म्यांमार सवालों के घेरे में आ गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी कई देशों ने म्यांमार पर आरोप लगाए है। इसका जवाब देते हुए म्यांमार के दूत ने रोहिंग्या मुस्लिम के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में कहा कि मुसलमानों का जातीय सफाया या नरसंहार नहीं हुआ है। लम्बे समय तक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले म्यांमार के नेता ऐसी नीतियों का समर्थन नहीं करते है। हम जातीय सफाया और नरसंहार को रोकने के लिए सब कुछ करेंगे। संयुक्त राष्ट्र ने सभी अंतर्राष्ट्रीय कम्युनिटी को राजनितिक भेदभाव से हटकर रोहिंग्या मुस्लिम की मदद करने को कहा। रोहिंग्या मुस्लिम के साथ ऐसी हिंसा का यह पहला हादसा नहीं है। इससे पहले भी 1991 ,1992, 2012 और 2015 में भी रोहिंग्या मुस्लिम के साथ हिंसा हो चुकी है। 2012 में एक बुद्धिस्ट औरत के साथ दो रोहिंग्या मुस्लिम ने बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी थी। जिसके बाद से वहाँ हिंसा का माहौल बन गया था और काफी मात्रा में पलायन हुआ था। अंतर्राष्ट्रीय कम्युनिटी के दबाव बनाने पर अब म्यांमार सरकार बांग्लादेश भागे शरणार्थियों के लिए जल्द ही राष्ट्रीय सत्यापन प्रक्रिया शुरू करने वाला है। म्यांमार के एक मंत्री ने इस बात की घोषणा की है। म्यांमार के समाज कल्याण, राहत व पुनर्वास विभाग के मंत्री ने कहा कि इस कदम से पहले स्टेट कॉउंसलर कार्यालय के अधिकारी इस प्रक्रिया पर अधिकारिओं से वार्ता के लिए बांग्लादेश जाएंगे।

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