आज के भारत को देखकर दुःखी होते बापू: तुषार गांधी

न्यूज़ स्टैंडर्ड के प्रधान संपादक के साथ महात्मा गांधी की 148वीं जन्‍म वर्षगांठ पर गांधी जी के प्रपोत्र तुषार गांधी ने विशेष बातचीत की।

Tushar Gandhi

पेश है उसके प्रमुख अंश-

आज के भारत को गांधी जी कैसे देखते?

गांधी जी आज के भारत को देखकर काफी निराश होते हैं जो सपना उन्होंने भारत के लिए देखा था आज देश उससे बहुत विपरित दिख रहा है। जहां विषमताएं बढ़ती जा रही है, जहां नागरिकों को सुविधाएं नहीं मिल रही है, जहां गरीबों की आवाज सुनाई नहीं दे रही है, जहां असहिष्णुता चरम सीमा पर आ गई है। यह सारी बातें बापू के लिए बेहद दुखद होती लेकिन बापू कितने भी दुखी क्यों ना होते लेकिन मायूस कभी नहीं होते बापू आशा कभी नहीं छोड़ते वह आशावादी थे वह हमेशा प्रयत्नशील रहते थे। बापू अपने विचार व सोच को लोगों तक पहुँचाते।

क्या गांधी परिवार गांधी जी की दिखाई राह पर चल रहा है?

हम सब सामान्य लोग हैं हम सब सामान्य जीवन जीते हैं। हम सब को यह बात समझनी होगी कि महात्मा बापू थे वंश परंपरागत ठीक नहीं है हम अपनी क्षमता अनुसार जितना कर सकते हैं उतना कर रहे हैं।

आपके विचार गांधी जी के विचारों से कितने मेल खाते है?

मेरे विचार बापू से एकदम तो नहीं मेल खाते मुझे अभी काफी दूर जाना है काफी समय लगेगा वहां तक पहुंचने में जो बापू के मूल विचार हैं,मूल आस्थाएं हैं वह मुझ में भी है। वह मंजिल अभी बहुत दूर है जब मैं यह कह सकूं कि मेरा जीवन बापू के आदर्शों के अनुरूप है।

भाजपा सरकार खादी को बढ़ावा दे रही इसे आप कैसे देखते है?

मैं इसकी सराहना करता हूं लेकिन इसका फायदा अब तक सूत काटने वालों और कपड़ा बुनने वालों तक नहीं पहुंचा क्योंकि अभी की जो खादी खादी विकास और ग्रामोद्योग आयोग में मिल रही है वह खादी नहीं है। जब तक गांव में खादी का उत्पादन नहीं होगा गांव की खादी बाजार में नहीं बिकेगी जिसे खद्दर कहा जाता है तब तक सामान्य व्यक्ति, कमजोर से कमजोर वर्ग के लोगों को रोजगार नहीं मिलेगा।यह कार्य करना बेहद जरूरी है अगर यह कार्य होता है तो सही मायने में खादी पुनर्जीवित होगी। खादी सिर्फ एक वस्त्र नहीं है खादी एक विचार है एक जीवन शैली का। ग्राम उत्पादन का मतलब खादी है।

पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पर आप क्या कहेंगे, क्या आज के भारत में अपने विचार प्रकट करना गुनाह है?

यह बहुत चिंताजनक है क्योंकि जब विचारों का सामना गोलियों से होने लगता है है तो यह समाज के पतन की निशानी है। इस विषय पर पूरे देश को चिंता करने की जरूरत है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है जो ज्यादा चिंताजनक बात है। हम कितने सहमे हुए हैं हम कितने खुदगर्ज बन गए हैं। यह विषय हमारे लिए एक खतरे की घंटी समान है जिससे हमारी नींद भी खराब नहीं हुई।

क्या मौजूदा सरकार राजशाही की तर्ज पर चल रही है?

हमारे देश में एक चक्रीय राज का माहौल बन गया है ऐसा लगता है जैसे पूरा देश एक इंसान के इरादों पर चलाया जा रहा हो यह सही तरीके से लोकशाही नहीं हो सकती है। इसमें जनता की आवाज कहीं भी नहीं दिखती। किसी की मंशा किसी की महत्वकांक्षा किसी की जोर-जबर्दस्ती का राज हो ऐसा लग रहा है।

आप गांधीवादी और गैर गांधीवादी लोगों को क्या संदेश देंगे।

बापू का जो संदेश हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है वह यह है कि हम एक राष्ट्र के नागरिक हैं और हम इस तरह बट नहीं सकते। हमारा देश मैं गांधीवादी और मोर्चा वादियों का स्पष्ट गठन हो रहा है यह एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है। हमें यह देखना चाहिए कि हम शांतिप्रिय विचारधारा से प्रेरित होंगे या खूनी विचारधाराओं से प्रेरित होंगे।

ashish@newsstandard.in

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