मैदान के बहार यह है रियल हीरो

Sachin Tendulkar

मानव जीवन का यही लक्ष्य है की वह अपने वचन,मन व शरीर से दूसरों की सहायता करे। एक अच्छा व्यक्तित्व उसी व्यक्ति का होता है जो निःस्वार्थ होकर दूसरों की सहायता करे, ज्यादातर यह देखा गया है कि जो व्यक्ति निस्वार्थ ही दूसरों की मदद करता है उस व्यक्ति को तनाव कम होता है और वह मानसिक व शारीरिक तौर पर खुश रहता है और उसे शांति की भी अनुभूति होती है इसीलिए जीवन मे हर व्यक्ति को दूसरों की सहायता करने के लिए आगे आना चाहिए। खिलाड़ी जो मैदान के बहार कर रहे है जन सेवा:

युवराज सिंह

अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट में छह गेंद में छह छक्के मारने वाले युवराज सिंह ने क्रिकेट के अलावा भी बहुत कुछ किया है क्रिकेट के मैदान पर बल्ला चलाने के अलावा भी इन्होंने अपने जीवन मे बहुत से ऐसे कार्य किये है जिनको जानकर आप इनकी प्रशंशा करेंगे। युवराज सिंह का एक एनजीओ है जिसका नाम है यूवीकैन फाउंडेशन। दान देने के मामले में युवराज भी किसी से कम नही है। कैंसर से लड़ाई जीतने के बाद युवराज सिंह ने यूवीकैन फाउंडेशन का निर्माण किया। यह फाउंडेशन उन व्यक्तियों के लिए समर्पित है जिन्हें  कैंसर हो जाता है। इसी के निवारण के लिए युवराज सिंह ने इस फाउंडेशन का निर्माण किया। इस फाउंडेशन का मुख्य कार्य है कैंसर जैसी घातक बीमारियों से लड़ना, इस घातक बीमारी से लड़ने के लिए लोगों को उचित जानकारी के साथ- साथ जागरूक करना भी है। युवराज भी अमेरिका में लंबे समय से इस बीमारी से जुझ रहे थे और अंत मे युवराज ने कैंसर को मात दी।

सचिन तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर न केवल एक अच्छे क्रिकेटर है बल्कि वह एक बहुत अच्छे इंसान भी है।शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो सचिन के व्यक्तित्व से प्रभावित न हुआ हो। लाइम लाइट से दूर रहने के बाद भी सचिन के नेक कार्य मीडिया में जगह बना ही लेते है। सचिन बहुत बड़े समर्थक है इस गैर सरकारी संस्था के जिसका नाम है अपनालय। इस संस्था का मुख्य कार्य है कुपोषण से बच्चों को बचाना व स्वच्छ जल उपलब्ध कराने का प्रयास। सचिन चार वर्ष से इस संस्था के साथ जुड़े हुए है सचिन साल में 200 बच्चो को स्पांसर भी करते है जो कि उल्लेखनीय व सराहनीय है। सचिन ने भारत मे 272 स्कुलो के पुनरुद्धार के लिए ऐश्वर्या राय के साथ मिलकर 13.6 करोड़ रुपये एकत्रित किये, और कोका कोला व माई स्कूल जैसे अभियानों में सहायता की। सचिन ने पोलियो के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी और जागरूकता फैलाई। सचिन 10 लाख रूपये भी दान कर चुके है एक अस्पताल को,बच्चो के हृदय रोगों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए। 2014 में सचिन के ऊपर बनी आत्मकथा ‘प्लेइंग इट माई वे’ की बिक्री का एक हिस्सा इस संस्था को दिया जाएगा,जो कुपोषण के खिलाफ लड़ रही है। सचिन ने स्वयं कहा कि मेरी आत्मकथा का एक हिस्सा कुपोषण व स्वच्छ जल मुहैया करवाने के लिए दिया जाएगा। अपनालय बोर्ड की सचिव डॉ. अपर्णा संस्थानम ने कहा के सचिन लंबे समय से हमारे मूक समर्थक रहे है और अपनालय में हम सभी उनके शुक्रगुज़ार है।

ब्रेट ली

ब्रेट ली एक तेज़ गेंदबाज़ के साथ साथ एक बहुत नेक व दरियादिल इंसान भी है। इनका भारत के साथ बहुत लगाव है और हिंदी भी थोड़ी बहुत जानते है। बच्चों के साथ समय व्यतीत करके इन्हें बहूत शांति व खुशी मिलती है। ब्रेट ली का कहना है अगर तुम मुझसे क्रिकेट छीन लो तो मैं उदास हो जाऊंगा परंतु अगर तुम मुझसे संगीत छीन लो तो मैं बर्बाद हो जाऊंगा। इस कथन से ही अनुमान लगाया जा सकता है कि क्रिकेट के साथ साथ ब्रेट ली को संगीत भी बेहद पसंद है। ब्रेट ली को संगीत बहुत पसंद है और वह बच्चों के साथ या जब भी समय मिलता है वे जरूर गाना गाते है 2007 में ब्रेट ली ने भारत मेमेव्सिक फाउंडेशन की शुरुआत की। इस फाउंडेशन का उद्देश्य उन वंचित लोगो या बच्चों से था जिन्हें संगीत से बहुत लगाव या जुड़ाव था। इस फाउंडेशन कार्य का उद्देश्य यह भी सुनिश्चित करना था कि भारत मे हाशिये वके बच्चों में सुधार व शिक्षित करके उन्हें समर्थ व सशक्त बनाना। भारत मे इस फाउंडेशन के छह केंन्द्र स्थापित है।

वीरेन्द्र सहवाग

वास्तव में सहवाग जितने मज़ाकिया है उससे कही ज्यादा वे गंभीर भी है क्रिकेट के मैदान में उन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी है लेकिन मैदान के बाहर भी इन्होंने बहुत कुछ ऐसा किया है जिसे जान आप इनकी वाह वाही करेंगे। सहवाग का अपना एक फाउंडेशन है जिसका नाम है सहवाग फाउंडेशन। साल 2015 में सड़क दुर्घटना में एक किसान के बेटे ने अपना पैर खो दिया था इलाज़ का खर्च इतना ज्यादा था कि परिवार उठा ही नही सकता था फिर सहवाग को जैसे ही इस व्यक्ति के बारे में पता चला वे तुरंत आगे आये इनकी मदद करने के लिए और सहवाग ने अपने बलबूते एक किसान के बेटे को दी एक नई ज़िन्दगी। एक ट्वीट में सहवाग ने लिखा कि बैटिंग करते वक्त शायद ही मेरे कदम हिलते थे मेरी इच्छा है कि मैं उन लोगों की चलने मदद करने में समर्थ होऊं जिन्हें चलने में असमर्थता है यह कोई पहला मौका नही है जब सहवाग ने  किसी की मदद की है। इससे पहले भी सहवाग ने कई लोगों की मदद की है कुछ समय पहले ही सहवाग ने ट्वीट कर रूपा देवी और संजीव की मदद करने के लिए लोगों से अनुरोध किया था और ट्वीटर पर ट्वीट की बाढ़ सी आ गई थी बहुतायत मात्रा में लोगों ने सहवाग की सराहना की और योगदान दिया, लोगों  ने अपने योगदान को ट्विटर पर फ़ोटो के साथ स्लिप भी संलग्न करके साझा किया। सहवाग के ट्वीट के दो दिन बाद फिर सहवाग ने ट्वीट के माध्यम से यह जानकारी दी कि संजीव अब अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है और चल सकता है। उसके बाद सहवाग ने हरभजन सिंह जे साथ साथ उन तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने इनके जीवन के सपनों को साकार किया। सहवाग के इस कार्य की सराहना सोशल मीडिया पर खूब हुई है और लोग सहवाग फाउंडेशन की भी खूब तारीफ कर रहे है।

गौतम गंभीर

गौतम गंभीर ने क्रिकेट के बाद भी लोगो की मदद करने के लिए हुए प्रतिबद्ध। गौतम गंभीर फाउंडेशन के माध्यम से गंभीर ने दिल्ली में गरीबों को हर दिन खाना मुफ्त में खिलाने के लिए एक रसोई का उद्घाटन किया। इसकी शुरुआत गौतम गंभीर ने पटेल नगर से की और उनका मानना यह है कि जिन लोगों  को खाना नसीब नहीं हो पाता और वे भूखे पेट सोने को मजबूर होते है उन तक ये सेवा पहुंचना इस फाउंडेशन की सार्थकता है। गौतम गम्भीर ने इस अभियान का नाम एक ‘आशा रखा’।गरीबों को भोजन खिलाना उनके लिए वर्ल्ड कप व आई पी एल जीतने के समान है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार वह लोगों के दिल जीतना चाहते है लोगों के दिलों में जगह बनाना चाहते है। गौतम गंभीर ने इस फाउंडेशन की शुरुआत सेना में शहीद हुए जवान व गरीब बच्चे जो भूख से बिलखते रहते है उनके लिए की थी जो बच्चे गरीबी की वजह से न पढ़ सकते है, न अच्छा जीवन जी सकते है उनके जीवन में आधार लाने के लिए गंभीर ने यह एक बहुत बड़ा कदम उठाया जिसके लिए लोगों ने उनकी बहुत प्रशंशा की है। गौतम गंभीर फाउंडेशन प्रत्येक दिन 1 बजे से 3 बजे तक खाना मुफ्त में खिलाता है। हज़ारों लोग और एक आशा के साथ उन्होंने यह कार्य किया।

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