मेरी हर साँस में संगीत बसा हुआ है: सोनम कालरा

गॉस्पेल म्यूजिक से श्रोताओं के बीच में अलग पहचान बनाने वाली मशहूर गायिका व "सोनम कालरा & द सूफी गॉस्पेल प्रोजेक्ट " की संस्थापक, सोनम कालरा से न्यूज़ स्टैंडर्ड ने विशेष बातचीत की। सोनम कालरा ने बातचीत के दौरान अपनी गायिकी की शुरुआत, अपनी प्रस्तुति "पार्टीशन: स्टोरीज ऑफ़ सेपरेशन बय सोनम कालरा " के बारें में जानकारी दी। पेश है विशेष बातचीत के प्रमुख अंश-

Sonam Kalra & The Sufi Gospel Project

सोनम जी, गायक बनने की शुरुआत कैसे हुई और ये ख्याल आपके मन में कब आया?

मेरी माँ संगीत और कला की बड़ी शौक़ीन थी तो शुरू से ही मेरे घर में संगीत का माहौल रहा है। मुझे याद है जब मैं 3 या 4 साल की थी तो अपनी माँ की गोद में बैठकर बेगम अख्तर जी का गायन सुनती थी। उनका गायन सुनकर मेरी माँ के चेहरे पे एक ऐसा सुकून नज़र आता था जो अब भी मेरे ज़ेहन में एक तस्वीर की तरह अंकित है। संगीत के प्रति मेरा रुझान तभी से ही शुरू हुआ। मेरी अम्मी चाहती थी के मैं हर तरह के संगीत और कविताओं से रूबरू हो सकूँ इसलिए मेरी दिलचस्पी संगीत साहित्य और कला की तरफ बढ़ती गयी।

मैंने बचपन में ही शास्त्रीय संगीत की तालीम हासिल करनी शुरू की और मैं बहुत खुशकिस्मत रही की जैसे-जैसे मैं बढ़ी होती गयी मझे ऐसे महारथियों से शास्त्रीय संगीत सिखने का मौका मिला जिनसे संगीत की तालीम लेना सभी के लिए एक सपना होता है। मैंने बचपन में उस्ताद नासिर फ़ैयाज़ुद्दीन डागर जी से संगीत सीखा। उसके बाद पद्मश्री शुभा मुद्गल जी से और पंडित सारथी चटर्जी से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में तालीम हासिल की। गॉस्पेल और जैज़ मैंने श्रीमती एश्ले क्लेमेंट से सीखा और ओपेरा कोरियन उस्ताद श्री हर चल यंग से सीखा।

आपके अनुसार संगीत क्या है?

मेरे लिए संगीत का मतलब है इबादत। मेरी हर साँस, मेरे ज़ेहन और मेरी रूह में संगीत ऐसा बसा हुआ है कि मुझे हज़रात शाह तज्जी का कलाम याद आता है जिसमें उन्होंने कहा है, “मैं होश में हूँ तो तेरा हूँ, दीवाना हूँ तो तेरा हूँ, हूँ राज़ अगर तो तेरा हूँ, अफसाना हूँ तो तेरा हूँ।” मेरी लिए संगीत यही है।

अपने देश विदेश में प्रस्तुति दी है। अपनी प्रस्तुति से जुड़ा कोई सुनहरा किस्सा आप हमारे साथ साझा करना चाहेंगी?

मेरे लिए ये बहुत ही खुशकिस्मती की बात है की मुझे अपना संगीत देश विदेश में प्रस्तुत करने का मौका मिला है। मेरे लिए सभी कंसर्ट्स बहुत यादगार होते हैं पर कुछ दिल के बहुत ही करीब हैं उनमें से कुछ, पिरामिड्स ऑफ़ ग़िज़ा के सामने परफॉर्म करना, ऑस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध सिडनी ओपेरा हाउस में परफॉर्म करना बेहद ख़ास है। मुझे मुज़फ्फर अली जी के सूफी फेस्टिवल जहान-ए-खुसरौ में आबिदा जी से पहले परफॉर्म करने का मौका मिला और हमने सेम स्टेज भी शेयर किया है, यह पल मेरे लिए यादगार है।

एमटीवी कोक स्टूडियो में हमें अपना संगीत, अपनी प्रस्तुति साझा करने का मौका मिला है। मुझे आज भी याद है जब हमने अपना पहला शो इंडिया हैबिटैट सेंटर में परफॉर्म किया तो शो खत्म होने के बाद हमें स्टैंडिंग ओवेशन मिली थी। साभार में मौजूद दर्शकों ने हमारे संगीत को बहुत सराहा था। साभार में सभी खड़े हुए थे तभी एक वृद्ध महिला स्टेज की तरफ बढ़ी और उन्होंने मुझे दुआ देते हुए कहा, “आज तुम्हारी आवाज़ खुदा तक पहुँची है।” ये सभी किस्से हमेशा याद रहते हैं और मेरे दिल के बहुत करीब है।

आप भविष्य में कहाँ परफॉर्म करना चाहती हैं?

मेरा ख्वाब है कि मैं मोरोक्को के फैज़ फेस्टिवल में परफॉर्म करूँ। मैं वोमेड इंटरनेशनल फेस्टिवल और रॉयल अल्बर्ट हॉल में भी परफॉर्म करना चाहूंगी।

“सोनम कालरा & द सूफी गॉस्पेल प्रोजेक्ट” का जन्म कैसे हुआ? इसका मकसद क्या है?

“सोनम कालरा & द सूफी गॉस्पेल प्रोजेक्ट” का जन्म सन 2011 में हुआ जब मुझे दिल्ली में सूफी संत इनायत खान की दरगाह पर उनके ऊर्ज के अवसर पर गॉस्पेल म्यूजिक गाने के लिए बुलाया गया। इससे पहले मेने गॉस्पेल म्यूजिक (क्रिस्चियन स्पिरिचुअल म्यूजिक) की प्रस्तुति गिरजाघरों में और फेस्टिवल्स में की थी। मैं जब भी गॉस्पेल म्यूजिक गाती थी तो लोग मुझसे पूछते थे कि एक लड़की जो सिख धर्म से है वो क्रिस्चियन भजन क्यों गाती है और मेरा जवाब हमेशा यही होता था, क्योंकि ईश्वर का कोई धर्म नहीं होता और वो सबके लिए एक हैं।

ज़रा सोचिये एक सिख लड़की एक इस्लामिक धार्मिक जगह में गॉस्पेल गाने के लिए बुलाई जा रही है। इसी सोच पर विचार करने पर मुझे लगा की कायनात मुझे एक रास्ता दिखा रही है, एक संदेशा दे रही है कि मैं संगीत के ज़रिये मैं इन सब धर्मों को जोड़ के एक ऐसी भाषा बनाऊँ, जो धर्म के भेद भाव से हटकर धर्म की समानता और प्रेम का सन्देश दे।

आपके पसंदीदा गायक कौन है जिनसे आपको प्रेरणा मिलती है और क्यों?

मेरी पसंदीदा गायिका आबिदा परवीन जी है। आबिदा जी जिस जूनून से खुद को खो के गाती है और अपने आप को ऊपर वाले के हवाले कर देती है वो उनके संगीत में प्रकट होता है। नुसरत साहब की गायकी भी मुझे बेहद पसंद है। मुझे जैज़ सिंगर्स में एला फिट्जगेराल्ड बहुत पसंद हैं। मुझे ऐसी आवाज़ें पसंद हैं जिनमें वज़न है और जो इंसान गा रहा है उसमें उनकी सच्चाई की झलक भी नज़र आती हो।

आप कई भाषाओं में गाती है। आपकी पसंदीदा भाषा कौन सी है जिसमें आपको गाना पसंद है?

मैं उर्दू, हिंदी, पंजाबी, फ़ारसी और इंग्लिश में गाती हूँ। मुझे ये सभी भाषाएँ पसंद हैं। मुझे भाषा और भाषा की सुंदरता पसंद हैI

भारत विभाजन आपके दिल के बेहद करीब रहा है। आपकी प्रस्तुति “पार्टीशन: स्टोरीज ऑफ़ सेपरेशन बाय सोनम कालरा” इस विषय पर आधारित है। इस प्रस्तुति में क्या कुछ ख़ास जो आप दर्शकों को दिखाना चाहती है?

यह प्रस्तुति मेरे दिल के बेहद करीब है। यह एक ऐसी अनुभवात्मक संगीत प्रस्तुति है जिसमें कला, वीडियो, नाटक कला और संगीत के द्वारा विभाजन को फिर से निर्वाह किया गया है जिसके ज़रिये हम कोशिश करते हैं कि हम ऐसे भविष्य की बात करें जिसमें शान्ति और उम्मीद हो और सबसे ज्यादा जरूरी है एक संवाद की शुरुआत। “पार्टीशन: स्टोरीज ऑफ़ सेपरेशन बाय सोनम कालरा” में उस समय के कवियों की कविताएँ लेकर उनका कम्पोजीशन बनाया गया है। उस समय के लोग जिन्होंने इस विभाजन को झेला उनके वीडियो टेस्टीमोनियल्स भी हम इस प्रस्तुति में दिखाते हैं।

हमने अब तक बॉर्डर के दोनों तरफ से करीब 200 शांति के सन्देश प्राप्त किये हैं और एक मंगलकामना की भावना रखते हुए फेसबुक पर एक पेज भी शुरू किया है। विभाजन की बात करना इसलिए भी बहुत जरूरी है ताकि आगे की पीढ़ियां इस विभाजन और इस दौरान जो गलतियां हुई, कितनी ज़िंदगियाँ बर्बाद हुई ना भूलें और ना इन गलतियां को फिर से दोहराएं।

आज के भारत को आप कैसे देखती है? आप आज के भारत में क्या बदलाव देखना चाहती है?

भारत एक विविधता और उम्मीद का देश है। मेरा मानना है कि हम अपनी परम्पराओं के कारण अपने देश से जुड़े हुए हैं और एक सुन्दर तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसा कुछ नहीं है जो मैं बदलना चाहूँगी बस एक चीज़ है जो मैं हर हिंदुस्तानी को याद दिलाना चाहती हूँ के भारत अपनी विविधता और विभिन्नता के कारण एक अद्भुत देश है, एक अद्भुत राष्ट्र है और हमें एक दूसरे की विभिन्नताओं का सम्मान करना चाहिए।

इसके साथ मैं एक शब्द पर ज़रूर ज़ोर देना चाहूँगी- स्वीकृति ना कि सहिष्णुता। ये बहुत जरूरी है कि हम एक दूसरे की विभिन्नताओं का सम्मान करें और ये हमेशा याद रखें कि हम इतनी पीढ़ियों से ईद, लोहड़ी, दिवाली, क्रिसमस मनाते आ रहे हैं ठीक उसी तरह से जिस तरह से हम एक दूसरे का सम्मान करते आये हैं,और यही भारत की खूबसूरती है।

भविष्य में आपकी क्या योजनाएं है?

मैं ये सब ईश्वर के हाथ में सौंप देती हूँ। ऊपर वाले ने जो भी मेरे लिए तय किया होगा मैं उससे पूरी तरह सहमत रहूंगी और वो जहाँ भी मुझे ले जाएँ मुझे उन पर पूरा विश्वास रहेगा।

ashish@newsstandard.in

 

Web Title: My every breath belongs to Music, says Sonam Kalra

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