इंटरनेशनल लेवल पर करना चाहती हूँ रेस: बानी यादव

भारत की सबसे तेज़ महिला रैली ड्राइवर, मोटरस्पोर्ट्स प्रमोटर और सामाजिक अधिकार समर्थक बानी यादव से न्यूज़ स्टैंडर्ड ने ख़ास बातचीत की जिसमें उन्होंने रेसिंग से जुड़े विशेष अनुभवों को साझा किया। बानी यादव भारत में आयोजित महिला वर्ग में सभी प्रमुख रैली टाइटल जीतने वाली भारत में एकमात्र महिला है। 69 वें गणतंत्र दिवस पर बानी यादव को हरयाणा सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पुरस्कार 2017 से नवाजा गया है। पेश है ख़ास बातचीत के प्रमुख अंश-

India's fastest women rally driver

बानी जी, कार रेसर बनने का ख्याल आपके मन में कैसे आया?

मेरे पिता जी की कार चलने में बहुत रूचि रही है। मैंने उन्हीं से कार चलाना सीखा उनको देख कर मुझे लगता था की मैं कार रेसर बनु जब मैं 10-12 साल की थी उसी समय मैंने निश्चय कर लिया था की मुझे कार रेसर ही बनना है उसी विचार को लेकर मैं बड़ी हुई।

आपने कार रेसर बनने की दिशा में 43 साल की उम्र में कदम रखा। आपको उस समय ऐसा नहीं लगा की अब बहुत देर हो चुकी है?

हाँ, मुझे ऐसा जरूर लगा था क्योंकि खेल के क्षेत्र में लोग 30-35 के आस-पास सन्यास ले लेते है। इस दिशा में शुरुआत करने से पहले मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं यह कर पाऊँगी या नहीं इस क्षेत्र में आगे जा पाऊँगी या नहीं लेकिन मुझे अपने ऊपर पूरा विश्वास था। पहली बार शुरू करते समय मुझे ऐसा जरूर लगा था कि मैं यह कर पाऊँगी या नहीं लेकिन इन सब चीजों को पीछे छोड़ मैं आगे बढ़ती रही।

आपके अनुसार रेसिंग करियर में आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?

हर रैली अपने आप में एक बड़ा अचीवमेंट होती है क्योंकि हर रैली, हर रेस बहुत मुश्किल होती है। मैं अलग-अलग तरह की रैली कर रही हूँ जिसमें ‘क्रॉस कंट्री रैली’ में ‘रैड द हिमालय’ भी आती है जो दुनिया की सबसे कठिन रैली में शामिल है क्योंकि यह सबसे ज्यादा ऊंचाई पर होती है। इस रैली को करना बहुत चुनातिपूर्ण होता है। ‘इंडियन रैली चैंपियनशिप’ की ‘रैली द नार्थ’ जो गुड़गांव में 2016 में हुई थी। उसमें पुरुषों के साथ रेस करते हुए मेरा दूसरा स्थान आया जो अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा एशिया कप ऑफ इंडियन रैली चैंपियनशिप में महिला वर्ग में मेरा प्रथम स्थान आया था और 2000 cc की केटेगरी में पुरुषों के साथ रेस करते हुए मैं प्रथम स्थान पर आयी जो रिकॉर्ड है। यह सब वो उपलब्धियां है जो मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है।

रेसिंग से जुड़ा कोई वाकया जहाँ आपको निराशा हुई?

हाँ, यह जरूर हुआ जब दूसरी दफा मैं ‘रैड द हिमालय रैली’ कर रही थी उस समय मेरी गाड़ी का रेडियेटर टूट गया, उसका इंजन सीज हो गया। जिस कारण मैं फाइनल स्टेज तक नहीं पहुँच पायी जिसका मुझे बहुत दुःख हुआ क्योंकि इस प्रतियोगिता की बस 2 स्टेज बची हुई थी।

आपने 2013 में ‘जयपुर स्पीड स्प्रिंट’ से अपने करियर का आगाज किया। उसी वर्ष आपको स्पाइन इंजरी से गुजरना पड़ा। इस हादसे के बाद आपके मन में रेसिंग छोड़ने का ख्याल आया था?

रेसिंग छोड़ने का ख्याल मेरे मन में कभी नहीं आया था। मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा था की मुझे स्पाइन इंजरी हो गयी है और अब मुझे घर पर बैठना पड़ेगा। मेरे मन में यही था कि मुझे जल्द से जल्द अपने पैरों पर खड़ा होना है और अपनी अलग-अलग गतिविधियों और रेसिंग में वापस आना है। मैंने निश्चय कर लिया था कि मुझे रेसिंग में आगे बढ़ना ही है चाहे कुछ भी हो। अगर स्पाइन इंजरी में कुछ गंभीर हो जाता तो तब का तब देखते पर ईश्वर कि दया से ऐसा कुछ नहीं हुआ।

कार रैली में भाग लेते समय आप किन बातों का ध्यान रखती है?

रैली में सबसे ज्यादा हमे अपनी गाड़ी का ख्याल रखना पड़ता है। महिलाओं को दिमाग में यह बात रखनी चाहिए कि आप पुरुष वर्ग वाले खेल में है। उसमे अपने आप को साबित करने के लिए आपको 100 प्रतिशत और मेहनत करनी पड़ती है। जब महिलाएं पुरुषों के साथ रेसिंग में होती है तो उनके प्रदर्शन पर विशेष नजर होती है। इन दो बातों का ध्यान तो मुझे रखना ही पड़ता है। रेसिंग के दौरान आपके ऊपर बहुत दबाब होता है इस समय दिमाग को संतुलित करके गाड़ी चलाना बहुत जरूरी होता है।

आप कार रैली में जाने से पहले और कार रैली के दौरान खुद को कैसे फिट रखती है?

रैली में जाने से पहले हम अपनी गाड़ी में ही दो दिन के खाने का सामान रखते है। हम अपने साथ चॉक्लेट्स, बिस्किट्स, जूस, पानी आदि जरूरत की चीजें रखते है जो रैली के दौरान हम खा सकें। रैली के दौरान हम इन्हीं चीजों को खाते है। रैली में आपको मीलों गाड़ी चलानी पड़ती है। आप ज्यादा खाना नहीं खा सकते क्योंकि इससे तबीयत बिगड़ने का डर रहता है। मैं रैली के समय हर 10-15 मिनट में 1 घुट जूस या पानी पीती रहती हूँ जिससे एनर्जी लेवल कम न हो और डिहायड्रेट भी न हो।

मैं रैली पर जाने से पहले अपनी डाइट पर कंट्रोल करती हूँ। मसाले और तली हुए चीजें का सेवन नहीं करती उससे तबीयत खराब होने का ज्यादा डर रहता है। मैं मैडिटेशन पर ध्यान देती हूँ। मैं अपनी बांहों और कंधों को मजबूत रखने की कोशिश करती हूँ क्योंकि रैली के दौरान बांहों और कंधों की मूवमेंट ज्यादा होती है। रैली के दौरान पैरों और कंधों में दर्द ज्यादा होता है क्योंकि इन पर स्ट्रेस ज्यादा होता है। मेरी कोशिश रहती है की मैं अपने बांहों, कंधों और पैरों की एक्सरसाइज करती रहूँ।

भविष्य में आपकी क्या योजनाएं है?

मेरा मकसद तो यहीं है की मैं इंटरनेशनल लेवल पर रेस करूँ। मेरी कोशिश इस साल होने वाली ‘एशिया पैसिफिक रैली चैंपियनशिप’ में भाग लेने की है। इसके लिए मुझे सरकार के सहयोग की बहुत जरूरत है।क्योंकि मोटरस्पोर्ट्स बहुत एक्सपेंसिव गेम है। इसमें आपकी गाड़ी बनाने और मेंटेनेंस में ही बहुत खर्चा हो जाता है और फिर एंट्री फीस भी होती है। मैं इसे सरकार के सहयोग के बिना नहीं कर सकती। मुझे उम्मीद है की सरकार इसमें सहयोग जरूर करेगी।

अपने बच्चों को मोटरस्पोर्ट्स से दूर रखने वाले अभिभावकों से आप क्या कहेंगी?

जब मैं बच्ची थी उस समय भारत में मोटरस्पोर्ट्स नहीं था इसलिए मेरे माता-पिता मुझे सपोर्ट नहीं कर पाएं लेकिन आज मोटरस्पोर्ट्स भारत में ऊपर जा रहा है। मैं सभी अभिभावकों से यह कहना चाहूंगी कि अगर उनके बच्चें मोटरस्पोर्ट्स में आना चाहते है तो उन्हें जरूर प्रोत्साहित करें।

ashish@newsstandard.in

 

Web Title: I want to do race at international level, says Bani Yadav

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