फोर्टिस अस्पताल ने पथरी के इलाज पर थमाया 36 लाख का बिल…

फोर्टिस अस्पताल की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। अभी आद्या मामले को लेकर अस्पताल की चर्चा थमी नहीं थी कि इसी बीच एक और मामले को लेकर अस्पताल चर्चा में है। अस्पताल में पथरी के इलाज के एवज में प्रबंधन द्वारा 36 लाख रुपए का भारी भरकम बिल थमा दिया गया। इसकी शिकायत परिजनों ने सी.एम.ओ. डॉ. बी.के. राजौरा से की है।

Fortis Hospital charged 36 lakh for treating gall bladder stone

गुरुग्राम: पिछले साल गांव दौलताबाद निवासी भीम सिंह (60) को पथरी के इलाज के लिए पार्क अस्पताल लाया गया जहां 2 दिन भर्ती रखने के बाद परिजन उन्हें फोर्टिस अस्पताल ले गए। वहां दाखिल करने के बाद मरीज लकवा ग्रस्त हो गया साथ ही पथरी का उपचार भी नहीं हो पाया लेकिन अस्पताल ने मरीज के उपचार का बिल 36 लाख रुपए बना दिया। इसके बाद गांव के लोगों ने गुरुवार को सी.एम.ओ. डॉ. बी.के. राजौरा से मुलाकात की जिसमें कहा कि लाखों बिल लेने के बावजूद पथरी का उपचार नहीं हुआ है।

उस वक्त जो पथरी 14 एम.एम. की थी वह अब 18 एम.एम. की हो गई है जबकि मरीज के दोनों पैर खराब हो गए। इसके कारण वह बिस्तर पर है। ग्रामीणों की शिकायत पर सी.एम.ओ. ने शिकायत लेकर मामले से जुड़े पूरे दस्तावेज मांगे हैं। वहीं डॉ. बी.के. राजौरा ने कहा कि फोर्टिस को लेकर एक साल पुराने मामले में शिकायत की गई है। पूरे मामले का अध्ययन कर आगे कार्रवाई करेंगे।

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ज्ञात हो कि इससे पूर्व 4 सितम्बर को द्वारका (दिल्ली) निवासी डेंगू 7 वर्षीय बच्ची आद्या की मौत हो गई थी। जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने 15 दिन के इलाज में 15 लाख से अधिक रुपये की वसूली की थी। मामला सुर्खियों में आने के बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से लेकर सुबे के स्वास्थ्य मंत्री तक ने मामले पर कार्रवाई के आदेश दिए। कार्रवाई की शुरूआत अभी हो ही रही थी कि इसी बीच एक और मरीज से अस्पताल द्वारा भारी भरकम बिल वसूलने को लेकर चर्चा में हैं।

फोर्टिस अस्पताल में डेंगू से हुई बच्ची की मौत पर अब स्वास्थ्य मंत्रालय गंभीर हो गया हैं। मंत्रालय ने बच्ची की मौत मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट में अस्पताल को दोषी पाया हैं। बताया जा रहा है कि 1- 2 दिनों में अस्पताल द्वारा बरती गई लापरवाही के खिलाफ न केवल मामला दर्ज कराया जा सकता है बल्कि उसके ब्लड बैंक का लाइसैंस भी निरस्त करने संबंधी तैयारी की जा रही हैं।

7 वर्षीय बच्ची आद्या को 31 अगस्त को गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में दाखिल कराया गया था। 4 सितंबर को अस्पताल से छुट्टी हुई थी। उसी रात बच्ची की मौत हो गई। बच्ची के परिजनों ने सोशल साइट पर यह आरोप लगाया था कि फोर्टिस अस्पताल प्रबंधन ने 15 दिन के इलाज में 18 लाख रुपये की रकम वसूली। दवाओं व ग्लब्स के रेट कई गुना ज्यादा लगाए। यहां तक कि बच्ची को अस्पताल से ले जाते वक्त नीचे डाली गई चादर के भी सात सौ रुपये ले लिए।

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मामला सुर्खियों में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. राजीव वडेरा के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया जिसमें स्वास्थ्य निदेशक, सिविल सर्जन गुरुग्राम, उपायुक्त गुरूग्राम के प्रतिनिधि, दो वरिष्ठ बाल रोग चिकित्सक, फारेंसिक एक्सपर्ट और पीजीआईएमएस रोहतक के सिनियर डॉक्टर शामिल थे। इस रिपोर्ट में अस्पताल प्रशासन की कार्य प्रणाली में गंभीर खामियों पाई गई इसके अलावा मरीज के उपर प्रयोग की दवाएं भी सही नहीं थी।

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इलाज के दौरान अस्पताल ने ना केवल डायग्नोज प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया बल्कि आईएमए के नियमों की भी अनदेखी की। बच्ची के उपचार में जेनेरिक और सस्ती दवाइयों की बजाय अस्पताल ने जानबूझ कर आईएमए के नियमों का उल्लघंन करते हुए महंगी दवाइयों का प्रयोग किया। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 1- 2 दिन के अंदर मंत्रालय द्वारा अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती हैं। जिसमें अस्पताल के ब्लड बैंक का लायसेंस रद्द करने के अलावा अस्पताल के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया जा सकता हैं।

 

Web Title: Fortis Hospital charged 36 lakh for treating gall bladder stone

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