अरुण जेटली दिन-रात लगाकर सभी देशवासियों को गरीबी दिखाने के लिए कर रहे है कार्य: यशवंत सिन्हा

Yashwant Sinha

नोटबांदी के फैसले को लेकर तो सरकार पहले भी सवालों के घेरे में रही है मगर पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के लिखे लेख ने फिर से सरकार को कई सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। यशवंत सिन्हा ने सिर्फ नोटबंदी पर ही नही बल्कि जी.एस.टी, आर्थिक वृद्धि दर में कमी, कृषि की बुरी हालत, विनिर्माण उद्योग में मंदी जैसे और भी कई आर्थिक मुद्दों पर ज़ोर दिया है। यशवंत सिन्हा ने कहा अपना राष्ट्रीय कर्तव्य पूरा करने के लिए उनका देश की बिगड़ती अर्थ व्यवस्था पर बोलना ज़रूरी हो गया है। उन्होंने अरुण जेटली पर निशाना सांधते हुए कहा कि पार्टी में सबसे होशियार और काबिल माने जाने की वजह से यह फैसला 2014 लोक सभा चुनाव से पहले ही हो गया था कि अरुण जेटली नए सरकार के वित्त मंत्री होंगे। प्रधानमंत्री ने फिर उन्हें वित्त मंत्री, रक्षा और कॉर्पोरेट मामलो का भी मंत्रालय सौप दिया। उन्होंने कहा कि मैंने वित्त मंत्रालय संभाला है, मैं जानता हुँ अकेले वित्त मंत्रालय में ही बहुत काम होता है। इस मंत्रालय को पुरे ध्यान की आवश्यकता होती है। यशवंत सिन्हा ने कहा विरासत में मिली समस्याएं जैसे बैंको के एनपीए रुकी परियोजनाएं निपटाने के बजाय अरुण जेटली ने स्थिती और खराब कर दी है।भारतीय अर्थ व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि दो दशकों में पहली बार निजी निवेश इतना कम हुआ है, औद्धयोगिक उत्पादन भी ध्वस्त रहा है। उन्होंने कृषि की बुरी हालत, विनिर्माण उद्योग में मंदी, सेवा क्षेत्र की धीमी गति और सभी सेक्टर के संकट में होने जैसे अर्थ व्यवस्था सूचक का ज़िक्र अपने लेख में किया। आर्थिक वृद्धि दर पर लिखते हुए यशवंत सिन्हा ने कहा कि मौजूदा आर्थिक वृद्धि दर गिर कर 5.7 प्रतिशत हो गई है जो की पुरानी गणना के अनुसार वास्तव में केवल 3.7 प्रतिशत ही है। यशवंत सिन्हा ने कहा कि आर्थिक वृद्धि दर कम होने की वजह का अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है और इससे निपटने के लिए उपाय किये जाने चाहिए। इसके लिए समय देने, दिमाग का गंभीरता से उपयोग करना, मुद्दे को समझने और तब योजना बनाने की ज़रूरत है। लेकिन एक इंसान से जिस पर 3 मंत्रालय की ज़िम्मेदारी हो, यह उम्मीद करना मुश्किल होगा।

नोटबंदी को उन्होंने घटती अर्थव्यवस्था में आग में घी डालने के समान बताया। वैसे तो मनमोहन सिंह और रघुराम राजन ने भी नोटबंदी के फैसले को सही नहीं बताया है। हालांकि, निति आयोग के उपाध्यक्ष,राजीव कुमार ने इन बातो को मानने से साफ इंकार कर दिया है। यशवंत सिन्हा ने कहा कि जीएसटी को गलत तरह से लागु किया गया है। नोटबंदी से लाखों लोगो ने नौकरियां गवाई है जबकि नई नौकरी पैदा नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें वित्त मंत्री के ग्रोथ बढ़ाने के लिए बनाए गए पैकेज का इंतज़ार है, जिसकी घोषणा अभी तक नहीं हुए है। यशवंत सिन्हा की कही बातों को सरकार मानने के लिए तैयार नहीं है। सरकार का कहना है कि यह आर्थिक मंदी कुछ वक़्त के लिए है और थोड़े समय बाद भारत फिर से अपनी अर्थ व्यवस्था को ठीक कर लेगा। राजनाथ सिंह ने भी भारत की अर्थ व्यवस्था को तेज़ी से बढने वाली अर्थ व्यवस्था बताकर इन सभी सवालों से मुँह फेर लिया। लेख के अंत में यशवंत सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री दावा करते है की उन्होंने काफी करीब से गरीबी को देखा है। अब उनके वित्त मंत्री दिन-रात लगाकर इस दिशा में काम कर रहे है कि सभी भारतीय उतने ही करीब से गरीबी को देख ले। अब देखना यह होगा कि आगे आने वाली आर्थिक वृद्धि दर भारत की अर्थव्यवस्था के तरफ क्या इशारा देती है। वह यशवंत सिन्हा को सही साबित करती है या गलत, यह अगले आर्थिक वृद्धि दर आने पर ही पता चल सकेगा।