इस कोर्स को करने के बाद आपको मिल सकता है विदेश जाने का मौका

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साइन लैंग्वेज यानी सांकेतिक भाषा इस भाषा को सीखना आसान है लेकिन इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए रचनात्‍मक सोच की जरूरत होती है। यह भाषा आप के लिए कॉरियर के कई नए रास्‍ते खोल देती है। साइन लैंग्वेज की समझ रखने वालों की जरूरत शिक्षा, समाज सेवा, सरकारी क्षेत्र जैसे कई क्षेत्रों में जरूरत होती है।

साइन लैंग्वेज क्‍यों जरूरी 

साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर सामने वाले की बातों को सुनाता है और फिर उन्‍हीं बातों को वह संकेतों में ढालकर दूसरों को समझता है। इसलिए साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर की जरूरत बहुत पड़ती है।

कैसे करें पढ़ाई 

इस विषय में छात्र स्‍नातक कर सकते हैं. साथ ही देश के करीबन 500 स्‍कूलों में इंडियन साइन लैंग्वेज सिखाई जाती है। साइन लैंग्वेज में तीन से चार महीने के कोर्स भी है। इन कोर्स के अलावा शारीरिक अशक्तता से ग्रस्‍त बच्‍चों के शिक्षण के लिए कई अन्‍य कोर्स भी उपलब्‍ध हैं। जिन्‍हें पूरा करने के बाद आप अच्‍छी नौकरी पा सकते हैं।

साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर की मांग कितनी 

भारत देश में मूक-बधिर लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। भारत में अधिक संख्‍या में लोग सांकेतिक भाषा समझते हैं। इसलिए मूक-बधिर लोगों को शिक्षा देने के लिए और रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए साइन लैंग्वेज सिखानी पड़ती हैं और इसे सिखाने वाले शिक्षकों की मांग हर दिन बढ़ रही है। इस का मतलब यह है कि साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर के अधिक अवसर हैं।

इस क्षेत्र में सैलरी कितनी होगी 

इस क्षेत्र में जो लोग कॉरियर बनाते हैं, उनकी सैलरी काफी अच्‍छी होती है। इस क्षेत्र में आपको विदेश में भी नौकरी आसानी से मिल सकती है। आप किसी विदेशी एनजीओ या फिर मेडिकल क्षेत्र से जुड़ते हैं तो शुरूआत में आप बीस से पच्‍चीस हजार रूपये आसानी से कमा सकते है साथ ही अनुभव के साथ वेतन भी बढ़ता रहता है।

इस कोर्स से जुड़े संस्‍थान 

इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, दिल्‍ली
रामकृष्‍ण मिशन विवेकानंद यूनिवर्सिटी, कोयंबटूर
अली यावर जंग नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द हियरिंग हैंडीकैप्ट, मुंबई

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